इस लेख के माध्यम से अब तक आप बहुत कुछ जान गये होंगे और महसूस करते होंगे कि:-

§ हिन्दी भाषी समाज के लिये काव्य भारती और मनीष दत्त द्वारा किया गया यह कार्य मौलिक तथा मूल्यवान है।
§ अर्थाभाव के कारण अब तक की गई सभी रचनाएं जिनमें स्वरबद्ध गीत, नृत्य नाटिकायें आदि जो समय-समय पर सामान्य रिकार्डरों में रिकार्ड किये गये सस्ते कैसेट और सामान्य वी.एच.एस. कैमरा से खींचे गये नृत्य नाटिका की कार्यक्रमों की निम्न स्तरीय रिकार्डिंग उपलब्ध है। विगत 56 वर्षों में मनीष दत्त द्वारा किये गये कार्य आज देख-भाल के अभाव में नष्ट होने के कगार पर है।  
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आशंका है भविष्य में मनीष दत्त के साथ ही हिन्दी समाज की यह अमूल्य थाती नष्ट हो जाएगी जो हिन्द और हिन्दी की भारी क्षति होगी। इसके लिए विश्वभर में फैले हुए हिन्दी प्रेमियों को अविलम्ब और स्वतःस्फूर्त रूप से सामने आना होगा।

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प्रश्न यह उठता है कि जब काव्य भारती का कार्य हिन्दी समाज के लिए इतना अद्भुत मौलिक और आवश्यक है तो फिर स्थानीय शासन-प्रशासन तथा अन्य संस्थान सामने क्यों नहीं आता ? आप जानते है आज हिन्दी की क्या दशा है विशुद्ध साहित्यिक कृतियों को पढ़ने सुनने वाले कितने बचे हैं। आज के धमाचौकड़ी मचाने वाले गीत-नृत्य के इस युग में कितने लोग शांत संगीत सुन पाते हैं। काव्य भारती और मनीष दत्त पूरी ईमानदारी और समर्पण के सथ अपने उद्देश्यों में आगे बढ़ते रहे हैं। उन्होंने कठिन परिस्थिति में भी आज तक कभी कोई समझौता नहीं किया।  न ही वे याचक की तरह झूठे व तिकड़मी व्यक्तियों से, चाहे वे कितने भी समर्थ व सम्पन्न क्यों न हों झोली फैलाकर कला और संस्कृति को लांछित नहीं किया।

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मनीष दत्त अत्यंत आशावादी, आदर्शवादी एकनिष्ठ तथा दृढ़ प्रतिज्ञ व्यक्ति है और उन्हें पूरा विश्वास है कि विश्व भर में फैले हुए हिन्दी के प्रेमी व्यक्ति और संस्थान इन बातों का पता चलते ही स्वमेव सामने आयेंगे। आज भी दुनिया के कोने-कोने में ऐसे लोग हैं जो साहित्य और संस्कृति के अधोगति से दुखी हैं। आप जानते है कि हमारे बीच में जो रूचि सम्पन्न है वे आर्थिक रूप से विपन्न है और इसके विपरीत अधिकांश सम्पन्न व्यक्ति कुरूचिग्रस्त हैं। वर्तमान में काव्य भारती का कार्य ऐसे ही गिने-चुने रूचि सम्पन्न आर्थिक रूप से सक्षम लोगों के अनुदान से ही चलता है।

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रूचि सम्पन्न परिवारों के बच्चों को मनीष दत्त निःशुल्क कला शिक्षा देते आये हैं और आज भी यह क्रम चल रहा है।

निदान

समय का चक्र चलता है और अच्छी चीजें वापस लौटकर आती है। हमारे देश में एक दिक्भ्रांति और अंधी दौड़ का दौर चल रहा है और इसकी व्याप्ति भयावह है। इस दौर से थक-हारकर जब लोग निराश बैठेंगे तो काव्य भारती की चीजों की उन्हें जरूरत पड़ेगी क्योंकि इन गीतों, नृत्यों नाटकों तथा नृत्य नाटिकाओं में हमारे देश की उच्चतम और भव्य संस्कृति का निरूपण है। अतएव यह आवश्यक है कि हम अपनी आज की इस उपलब्धि को कल की पीढ़ी के लिए सहेज कर और संरक्षित करके रखे ताकि समय आने वाली भावी पीढ़ी तथा दूर-दूर में फैले हुए रूचि सम्पन्न लोग इसका उपयोग कर सकें।

तात्कालिक आवश्यकता
 जैसा कि हम बता चुके है:-
1. 2000
गीतों को पुनः गीत और नृत्य के रूप में व्यवस्थित और स्तरीय रिकार्डिंग करना। ताकि ऐसे लोगों तक, जिन्हें इसकी आवश्यकता है, इसे पहुंचाया जा सके तथा इनका संग्रह भी तैयार हो सके।

2.
मनीष दत्त की उम्र हो चुकी है और वे ही अकेले व्यक्ति है जिनका यह संपूर्ण सृजन है, अतएव यह आवश्यक है कि उनके जीवन काल में ही उन्हीं के निर्देशन में सारे गीतों, नृत्यों और नाटिकाओं की पुनः प्रस्तुति की जाए, ताकि इसके स्वरूप और मंतव्य में किसी प्रकार का कमी न हो या विकृति न हो।

इसीलिए हम-आप तक पहुंचे है  कि आप स्वविवेक से अपना यथासाध्य सहयोग इस पुनीत कार्य में स्वयं हाथ बंटाने तथा लोगों को प्रेरित करने आगे आवें। यह हिन्द और हिन्दी के लिए अत्यंत आवश्यक है। बूंद-बूंद से सागर भरता है। आपका छोटा आर्थिक अनुदान या सहयोग चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो संस्कृति का महासागर बनकर लहरायेगा इसे आप सच माने

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